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अंग्यारी महादेव मंदिर के पुजारी महाराज अलख मुनि की मौत के मामले में पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। पुलिस ने इस मामले में महाराज के साथी साधु और वाहन चालक को गिरफ्तार किया है।
घटना का विवरण
पुलिस के अनुसार, महाराज अलख मुनि बद्रीनाथ के कपाट बंद होने के बाद 18 नवंबर को एक साथी साधु के साथ अंग्यारी महादेव मंदिर लौट रहे थे। 23 नवंबर को, वाहन चालक और साथी साधु के साथ यात्रा के दौरान, शराब के नशे में हुए विवाद के कारण महाराज का संतुलन बिगड़ गया, जिससे वह पहाड़ी से गिर गए।
पुलिस की कार्रवाई
25 नवंबर को, मजकोट के पूर्व ग्राम प्रधान मदन मोहन गुंसाई ने पुलिस को सूचना दी कि महाराज अंग्यारी महादेव मंदिर नहीं पहुंचे हैं। इसके बाद पुलिस और फोरेंसिक टीम ने महाराज का शव मंदिर के पास संदिग्ध परिस्थितियों में बरामद किया।
कैसे पकड़े गए आरोपी?
वाहन चालक हरेंद्र सिंह रावत और साथी साधु अर्जुन गिरि पर पुलिस को शुरू से शक था। जांच के दौरान 40 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए। पुलिस ने 250 से ज्यादा मंदिरों और मठों की छानबीन की। अंततः, अर्जुन गिरि को देहरादून के डोईवाला इलाके से गिरफ्तार किया गया।
मौत की वजह
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि शराब पीने के बाद, महाराज ने दोनों पर गाली-गलौज की। इसी दौरान संकरे रास्ते पर महाराज फिसल गए। दोनों ने उन्हें संभालने की कोशिश की, लेकिन विवाद बढ़ने पर उन्हें छोड़ दिया, जिससे वह पहाड़ी से गिर गए।
क्या जान बचाई जा सकती थी?
आरोपियों ने स्वीकार किया कि यदि उन्होंने घटना की सूचना तुरंत ग्रामीणों या अन्य साधुओं को दी होती, तो महाराज की जान बच सकती थी।
पुलिस की सराहना
एसपी चंद्रशेखर आर. घोड़के ने इस मामले की सुलझाने वाली टीम को पुरस्कृत करने की घोषणा की है।
इस घटना ने क्षेत्र में सनसनी फैला दी है और लोगों में आक्रोश का माहौल है। पुलिस के इस खुलासे से मामले की सच्चाई सामने आई है।